विश्व
भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मॉग
- 2010

9 जनवरी 2010- दिल्ली के द्वारका सैक्टर-8 में स्थित दादा देव मेला ग्राउण्ड पर पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान में दो दिवसीय विश्व भोजपुरी सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए माननीया लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार ने कहा कि भोजपुरी केवल भाषा नही, दर्शन भी है। इसमें मैं नहीं होता बल्कि `हम´ होता है जो सामुहिकता का बोध कराता है। उन्होंने आगे कहा कि भोजपुरी एक परिष्कृत जीवन शैली भी है। भोजपुयिा जहां भी गये वहां चमक आ गई। दिल्ली की चमक के पिछे भी भोजपूरिया पसीना बहा है। इस अवसर पर पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह ने भोजपुरी भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में सम्मिलित करने की पुरजोर मांग करते हुए कहा कि पूरे विश्व में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या बीस करोड़ से भी अधिक है, परन्तु अपने देश में ही भोजपुरी को उसका उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। श्री सिंह ने ये मांग की कि लोकसभा के आगमी सत्र में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने सम्बंधी बिल पारित कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भेाजपुरी की उपेक्षा को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूर्वांचल एकता मंच इसके लिए लोकतान्त्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा।

वरिष्ठ सांसद श्री रविशंकर प्रसाद ने श्री शिवजी सिंह की मांग का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि जिस तेजी से भोजपुरी भाषा का पूरी दुनिया में प्रचार-प्रसार हो रहा है, इसे देखते हुए इसको अष्टम अनुसूची में शामिल करने से कोई नहीं रोक सकता, भले ही छोटी-मोटी बाधाएं आती रहें। सांसद श्री प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि भोजपुरी लोगीतों एवं फिल्मों की अपार लोकप्रियता से यह स्पष्ट हो जाता है कि भोजपुरी भाषा कितनी सशक्त है। ऐसे में इसका यह अधिकार बनता है कि इसे संविधान की आठवी अनुसूची में शामिल किया जाए।

मोरिशश से आई वरिष्ठ साहित्यकार सरित बूद्धू ने कहा कि मोरिशश मे जल्द ही भोजपुरी भाषा को मान्यता मिलने जा रही है। यह भारत में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल होने से पहले ही हो जायेगा। उन्होंने आगे बताया कि जिस प्रकार भोजपुरी भारत ही नहीं अपितु विश्व के कई भागों में बोला और समझा जाता है ऐसे में भारत में ही इसकी मान्यता न होना शर्म की बात है।

इस अवसर पर बोलते हुए सिवान के सांसद श्री ओमप्रकाश ने कहा कि भोजपुरी भाषा में साहित्य का भी प्रयुर भण्डार है। इस भाषा की मिठास लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींच लेती हे। भोपुरी में महुआ टी.वी. चैनल भी शुरू हो चुका है, इसलिए भोजपुरी संविधन की आठवीं अनुसूची की सच्ची हकदार है। कई छोटे-छोटे भाषाओं को मान्यता प्राप्त है जबकि भोजपुरी राष्ट्रीय ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय भाषा है। आगामी सत्र में हम भोजपुरी भाषा की मान्यता के लिए संसद में पुरजोर आवाज उठायेगें।
लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती कुमार को भोजपुरी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस समारोह में दैनिक जागरण समाचार पत्र के मुख्य महाप्रंबधक भी निशिकान्त ठाकुर को लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार ने `पत्रकारिता गौरव सम्मान´ से अलंकृत किया तथा भोजपुरी अिस्मता सम्मान महायोगी माहमण्डलेश्वर कपित अद्वैत (पायलट बाबा) तथा मोरिशश से आई सरिता बुद्धू को दिया गया।
इस समारोह में उपस्थित अन्य गणमान्य सांसदों रघुवंश प्रसाद सिंह, श्री राजीव प्रताप रूढ़ी, श्री महाबल मिश्रा, श्रीमती मीना सिंह, श्री सुशील कुमार सिंह आदि ने भोजपुरी भाषा को संविधान के अष्टम अनुसूचि में शामिल करने के बात कहीं।
सम्मेलन के दूसरे सत्र में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था - `भोजपुरी गद्य साहित्य की विकास यात्रा´। इस सत्र के मुख्य अतिथि डॉ. जयकान्त सिंह `जय´ ने भोजपुरी गद्य साहित्य को प्र्यापत समृद्ध बताया, इस विचार संगोष्ठी में डॉ. बृजभूषण मिश्रा, डॉ. जौहर शाफियाबादी, डॉ. शत्रुघ्न सिंह, डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना, श्री गुरूचरण, डॉ. जर्नादन सिंह, श्री मनोज भावूक, मनोज श्रीवास्तव, प्रो. वृजकिशोर, रूप श्री, नागेन्द्र सिंह, श्री सुरेश गुप्ता, श्री अभय त्रिपाठी आदि भोजपुरी के ख्याति प्राप्त साहित्यकारों ने भोजपुरी गद्य साहित्य की विकास यात्रा पर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम के तीसरे सत्र `भोजपुरी कवि सम्मेलन´ में उद्घाटनकत्ताZगुरूचरण सिंह तथा अध्यक्षता गोरख प्रसाद मस्ताना ने किया। इसमें भाग लेने वाले कवि गणों में सुभाष यादव, श्री सन्तोष सिन्हा, श्री मनोज भावुक, श्री सन्तोष पटेल आदि शामिल थे। इस सम्मारोह में उपस्थित गणमान्य लोगों में पूर्वांचल एकता मंच के संरक्षक हरेन्द्र प्रताप सिंह, संजय सिंह, विनोद तिवारी, तथा आरके सरकार शामिल थे।




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