विश्व
भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मॉग
2008

पूर्वांचल एकता मंच एवं भोजपुरी समाज के संयुक्त
तत्वावधान मे आयोजित ´विश्व भोजपुरी सम्मेलन´ के सांस्कृतिक सत्र का
उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय मंत्री श्री राम विलास पासवान ने भोजपुरी
भाषा को दुनिया की सबसे मधुर भाषा बताया। उन्होंने कहा कि भोजपुरी
फिल्मों और लोकगीतों ने पुरी विश्व में अपनी लोकप्रियता सिद्ध कर दी
जै। श्री पासवान ने वहॉ उपस्थित हजारों भोजपुरी भाषियों को यह आश्वासन
भी दिया की भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने
के लिए वे हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने श्री संतोष सिन्हा द्वारा
सम्पादित पूर्वांचल एकता मंच की पत्रिका ´पूर्वांकुर´ का लोकार्पण
भी किया।
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कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मिख्यमंत्री श्रीमती शीला
दीक्षित ने समारोह के आयोजन के लिए पूर्वांचल एकता मंच एवं भोजपुरी
समाज को बधाई देते हुए कहा कि दिल्ली के लाखों पूर्वांचलवासियों की
भावनाओं का सम्मान करते हुए दिल्ली सरकार ने मैथिली-भोजपुरी अकादमी
की स्थापना की है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार इस अकादमी के
माध्यम से भोजपुरी साहित्य का प्रकाशन एवं साहित्यिक कार्यक्रमों का
आयोजन करने के लिए पर्याप्त धन मुहैया कराएगी। इस अवसर पर पूर्वांचल
एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह ने मुख्यमंत्री से मॉग की कि
दिल्ली में पूर्वांचल भवन का निर्माण कराया जाए। उन्होंने विभिन्न
सरकारी समितियों में पूर्वांचलवासियों को समुचित प्रतिनिधित्व देने,
बी. पी. एल. कार्ड बनाते समय पूर्वांचल के लोगों से भेदभाव न करने
और सार्वजनिक स्थानों पर वीर कुंवर सिंह, मंगल पांडे जैसे पूर्वांचल
के महान जननायकों की प्रतिमा लगाने, उनके नाम पर एन स्थलों का नामकरण
करने एवं द्वारका में छठ घाट का निर्माण कराने की भी मॉग की।
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इस अवसर पर एक संगारंग भोजपुरी लोकसंगीत का भी आयोजन
किया गया। भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार गायक व अभिनेता मनोज तिवारी
ने आकर्षक अंदाज में भोजमुरी गीत गाते हुए दशZकों को थिरकने पर मजबूर
कर दिया। सुप्रसिद्ध फिल्मी गायक कुमार शानू के लोकप्रिय गीतों को
सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। शर्मिला पाण्डेय, तरूण तूफानी, सीमा
तिवारी आदि कलाकारों ने भी प्रस्तुत किए। इस अवसर पर मनोज तिवारी को
´महेन्द्र मिसिर सम्मान´ कुमार शानू को ´भिखारी ठाकुर सम्मान´ एवं
डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना को ´भोजपुरी गौरव सम्मान´ से सम्मानित किया
गया।
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इस दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन कार्यक्रम का उद््घाटन
पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री जनेश्वर मिश्र ने किया। श्री मिश्र का
स्वागत भोजपुरी समाज के अध्यक्ष श्री अजीत दुबे ने किया। उद्घाटन सत्र
के मुख्य अतिथि भाजपा प्रवक्ता श्री रविशंकर प्रसाद ने भोजपुरी को
संविधान की अष्टम सूची में शामिल करने का पुरजोर समर्थन किया। विशिष्ट
अतिथि भाजपा प्रवक्ता श्री राजीव प्रताप रूड़ी ने भोजपुरी भाषा की मिठास
की प्रशंसा करते हुए इसे उचित सम्मान देने की मॉग की। सांसद श्री देवेन्द्र
प्रसाद यादव, पूर्व मंत्री श्री सी. पी. ठाकुर, लोकजन शिकायत परिषद्
के चेयरमैन श्री बालेश्वर राय, विधायक श्री धर्मदेव सोलंकी एवं श्री
महाबल मिश्र आदि लोगों ने भी भोजपुरी को संविधान की अष्टम अनुवूची
में सम्मिलित करने की मॉग की। इस अवसर पर श्री जनेश्वर मिश्र ने कहा
पूरे विश्व में भोजपुरी बोलने वालों की संख्या 20 करोड़ से भी अधिक
है। फिर भी इसे उपेक्षा की दृष्टि से देखा जा रहा है।
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इस कार्यक्रम में भोजपुरी हास्य कवि सम्मेलन का भी
आयोजन किया गया। इसमें डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना, धनुशधारी कुशवाहा,
मनोज भावुक, बादशाह प्रमी, गयाशंकर प्रमी, ज्ञानेश्वर गुंजन आदि कवियों
ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को रसविभोर कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन
डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव ने किया।
समारोह में ´भोजपुरी अष्टम सूची में क्यों नहीं´
विषय पर एक विचार संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन वरिष्ठ
साहित्यकार डॉ. रामदरश मिश्र ने किया। डॉ. मिश्र ने कहा - ´भोजपुरी
एक समृद्ध भाषा है, परन्तु स्थान-स्थान पर इसके स्वरुप में विविधता
है। आवश्यकता इस बात की है कि भोजपुरी का एक मानक स्वरुप स्थापित किया
जाए´। इस गोष्ठी में डॉ. प्रभुनाथ सिंह, डॉ. राजेन्द्र गौतम, श्रीमती
अलका सिन्हा, डॉ. रमाशंकर श्रीवास्तव आदि वक्ताओं ने भी अपने विचार
व्यक्त किए। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नित्यानंद
तिवारी ने की।
इस अवसर पर भोजपुरी के शेक्सपीयर कहे जाने वाले भिखारी
ठाकुर के नाटक ´विदेसिया´ का भी मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन श्री
उमेश सिंह ने किया। इस सम्मेलन में भोजपुरी समाज के अध्यक्ष सर्वश्री
अजीत दुबे, पी. एन. पांडे, गरीब दास, एल. एस. प्रसाद, पूर्वांचल एकता
मंच के सर्वश्री एच. पी. सिंह, बी. एन. चौधरी, विनोद तिवारी, अमरेन्द्र
सिंह, संतोष सिन्हा, संतोष पटेल, रमेश कुमार सिंह, सुरेन्द्र सिंह,
एस. के. दुबे, के. के. मिश्रा, नगेन्द्र सिंह आदि गणमान्य व्यक्ति
उपस्थित थे।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी
महान कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष
की अष्टमी तिथि को हुआ था। ´पूर्वांचल एकता मंच´ प्रत्येक वर्ष इस
दिन को ´श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह´ का आयोजन करता ह। पूर्णतया
भक्तिमय परिवेश में हजारो की संख्या में पूर्वांचलवासी इस समारोह में
भाग लेते है। पूरे दिन एवं मध्य रात्रि तक गीत - संगीतमय भजन व पूजन
का कार्यक्रम चलता रहता है। इस अवसर पर देश के अनेक सुप्रसिद्ध भोजपुरी
लोकगायकों - गायिकाओं द्वारा भक्तिगीतों की आकर्षक प्रस्तुति की जाती
है। भगवान श्री कृष्ण के छठियार के दिन संस्था की ओर से एक विशाल भण्डारे
का आयोजन भी किया जाता है जिसमें हजारों लोग भोजन रूपी भगवान का प्रसाद
पाकर स्वयं को धन्य अनुभव करते है।

अष्टयाम्
पूर्वाचल एकता मंच प्रति वर्ष अष्टयाम का आयोजन करता है।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
इस महामंत्र का गायन 24 घंटे तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा पूरी
लय और ताल के साथ मधुर स्वर में किया जाता है।इस महायज्ञ में हजारों
लोग भाग लेते हैं। यज्ञ के पश्चात् भंडारे का आयोजन किया जाता है।
इस समारोह में सर्वश्रेष्ठ कीर्तन मंडली को पुरस्कृत भी किया जाता
है।


छठ पर्व
समस्त पूर्वांचल क्षेत्र में सूर्य देवता की आराधना छठ पूजा के रुप
में की जाती है। यह त्योहार पूर्वांचल की संस्कृति की पहचान है। इस
पर्व में भगवान भास्कर की उपासना संध्या और प्रात: दोनो समय अध्र्य
देकर की जाती है। ´पूर्वांचल एकता मंच की सभी शाखाएं प्रत्येक वर्ष
अपने-अपने क्षेत्र में छठ पर्व समारोह का आयोजन करती हैं। इस पूजन
समारोह में लाखों स्त्री-पुरुष श्रद्धा व उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए
अपने आराध्य सूर्य देवता को फल, फूल, मिष्ठान, ठेकुआ, पकवान आदि अर्पित
करते हुए उपासना करते है।


स्वास्थ्य शिविर
14 नवंबर 2001 को पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान
में एक स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. बी.के. सिंह एवं
अन्य चिकित्सकों के द्वारा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के स्वास्थ की
जॉच की गई। संस्था की ओर से दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया गया।
होली मिलन समारोह
´पूर्वांचल एकता मंच´ हर साल अत्यंत धूमधाम के साथ होली मिलन समारोह
का आयोजन करता है। पूर्वांचल के हजारों लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर
परस्पर गले मिलते है और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम व सद्भाव
को प्रकट करते है। इस समारोह में पूर्वांचल के सुप्रतिष्ठत राजनेता
साहित्यकार, लाककलाकार, समाजसेवी आदि सम्मिलित होते है और उनस्थि जनसमूह
को संबोधित करते है। इस अवसर पर देश के जाने-माने भोजपुरी व मैथिली
गायक-गायिका अपने सुमधुर स्वर में फगुआ, चैती, होरी आदि लोकगीत गाकर
लोगों को रसविभोर कर देते है।

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