विश्व भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मॉग - 2008
 
  भागवत कथा का आयोजन - 2007  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2006  
  द्वारका में पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह आयोजित - 2005  
  भोजपुरी भाषा के लिए प्रदर्शन - 2004  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2003  
  विश्व भोजपुरी सम्मेलन में- 2002  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2001  
   

 

किसी भी संस्था की ताकत उसकी समिति के बुलद इरादे वाले सदस्य होते हैं। पूर्वांचल एकता मंच (रजि.) की कोर टीम में ऐसे सदस्यों की कमी नहीं है जो अपने रोमर्रा की जिनदगी से दो हाथ करते हुए भी अपने समाज अपने क्षेत्र और अपने मातृभासा के बारे में न सिर्फ बौद्विक स्तर पर सोचते है बल्कि जरूरत पडने पर धरना प्रर्दशन और आंदोलन के लिए तैयार भी रहते है।
 
   


 

 

 
   
 



 

भागवत कथा का आयोजन - 2007

पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान में 23 फरवरी 2007 को भागवत कथा का शुभारम्भ हुआ। इस अवसर पर 501 सौभाग्यवती महिलाओं ने सिर पर कलश लेकर कलश यात्रा में भाग लिया। द्वारका सैक्टर-8 दिल्ली के दादा देव मंदिर प्रांगण में आयोजित भागवत कथा का शुभारम्भ करते हुए जगद्गुुरू शंकराचार्य स्वामी ओंकारानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण रुपी अमृत हमें हमरता का पथ दिखाता है। उन्होंने कहा कि आत्मा का मोक्ष ही अमरता है। भागवत कथा को सुनने से मनुष्य सांसारिक माया के बंधनों से मुक्त हो जाता है। मनुष्य भगवान की भक्ति के पथ पर अग्रसर हो जाता है और परम पद प्राप्त करने का अधिकारी बन जाता है।

 

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के वाचक आचार्य बालयोगी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत का संबंध भगवान से है। जो स्वरुप भगवान का है, वही भागवत का है। जीव अपने दोषों को दूर करने और शांति प्राप्त करने हेतु कथा सुनता है। श्रोता जीवन- मृत्यु के बंधन से मुक्ति पा लेता है।

श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन आचार्य बालयोगी जी ने कहा कि महाराज परीक्षित को माध्यम बनाकर शुकदेव जी महाराज ने समष्टि का कल्याणकारी भागवत का प्रसाद समस्त जनसमुदाय को दिया। अगले दिन की कथा में आचार्य जी ने कहा कि धर्म के लिए कभी भीरु नहीं होना चाहिए। निर्मयता मानवीय गुरु है।

 

अपने अगले प्रवचों में स्वामी जी ने साधक के जीवन में सावधानी की आवश्यकता, दृढ संकल्प से सिद्धि की प्राप्ति सजग साधना से शाश्वत सत्य की उपलब्धि आदि विशयों पर विस्तार से पगकाश डाला।

श्रीमद्भागवत कथा में गीता आश्रम ऋषिकेश के महंत स्वामी स्वधर्मानंद सरस्वती जी महाराज के साथ ही अनेक प्रसिद्ध आचार्यों ने भी अपने प्रवचन से उपस्थित श्रोताओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह ने सभी आचार्यों एवं उपस्थित श्रोताओं का धन्यवाद किया।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

महान कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। ´पूर्वांचल एकता मंच´ प्रत्येक वर्ष इस दिन को ´श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह´ का आयोजन करता ह। पूर्णतया भक्तिमय परिवेश में हजारो की संख्या में पूर्वांचलवासी इस समारोह में भाग लेते है। पूरे दिन एवं मध्य रात्रि तक गीत - संगीतमय भजन व पूजन का कार्यक्रम चलता रहता है। इस अवसर पर देश के अनेक सुप्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायकों - गायिकाओं द्वारा भक्तिगीतों की आकर्षक प्रस्तुति की जाती है। भगवान श्री कृष्ण के छठियार के दिन संस्था की ओर से एक विशाल भण्डारे का आयोजन भी किया जाता है जिसमें हजारों लोग भोजन रूपी भगवान का प्रसाद पाकर स्वयं को धन्य अनुभव करते है।

छठ पर्व

समस्त पूर्वांचल क्षेत्र में सूर्य देवता की आराधना छठ पूजा के रुप में की जाती है। यह त्योहार पूर्वांचल की संस्कृति की पहचान है। इस पर्व में भगवान भास्कर की उपासना संध्या और प्रात: दोनो समय अध्र्य देकर की जाती है। ´पूर्वांचल एकता मंच की सभी शाखाएं प्रत्येक वर्ष अपने-अपने क्षेत्र में छठ पर्व समारोह का आयोजन करती हैं। इस पूजन समारोह में लाखों स्त्री-पुरुष श्रद्धा व उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए अपने आराध्य सूर्य देवता को फल, फूल, मिष्ठान, ठेकुआ, पकवान आदि अर्पित करते हुए उपासना करते है।

स्वास्थ्य शिविर

14 नवंबर 2001 को पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान में एक स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. बी.के. सिंह एवं अन्य चिकित्सकों के द्वारा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के स्वास्थ की जॉच की गई। संस्था की ओर से दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया गया।

होली मिलन समारोह

´पूर्वांचल एकता मंच´ हर साल अत्यंत धूमधाम के साथ होली मिलन समारोह का आयोजन करता है। पूर्वांचल के हजारों लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर परस्पर गले मिलते है और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम व सद्भाव को प्रकट करते है। इस समारोह में पूर्वांचल के सुप्रतिष्ठत राजनेता साहित्यकार, लाककलाकार, समाजसेवी आदि सम्मिलित होते है और उनस्थि जनसमूह को संबोधित करते है। इस अवसर पर देश के जाने-माने भोजपुरी व मैथिली गायक-गायिका अपने सुमधुर स्वर में फगुआ, चैती, होरी आदि लोकगीत गाकर लोगों को रसविभोर कर देते है।


 

 

 
     
 
   
   
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शिवजी सिंह
अध्यक्ष
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