विश्व भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मॉग - 2008
 
  भागवत कथा का आयोजन - 2007  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2006  
  द्वारका में पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह आयोजित - 2005  
  भोजपुरी भाषा के लिए प्रदर्शन - 2004  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2003  
  विश्व भोजपुरी सम्मेलन में- 2002  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2001  
   

 

किसी भी संस्था की ताकत उसकी समिति के बुलद इरादे वाले सदस्य होते हैं। पूर्वांचल एकता मंच (रजि.) की कोर टीम में ऐसे सदस्यों की कमी नहीं है जो अपने रोमर्रा की जिनदगी से दो हाथ करते हुए भी अपने समाज अपने क्षेत्र और अपने मातृभासा के बारे में न सिर्फ बौद्विक स्तर पर सोचते है बल्कि जरूरत पडने पर धरना प्रर्दशन और आंदोलन के लिए तैयार भी रहते है।
 
   


 

 

 
   
 


 

द्वारका में पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह आयोजित - 2005

नयी दिल्ली, 9 अप्रैल। राजधानी में रह रहे पूर्वांचलवासियों को सम्मान दिलाने, भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने और साहित्य अकादमी की भाषा बनाये जाने के लिए ´पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह´ का आयोजन मेला ग्राउंड द्वारका में किया गया। कार्यक्र्रम का आयोजन ´पुर्वांचल एकता मंच´ की ओर से किया गया है। सुबह से देर रात तक चले इस कार्यक्रम में विचार गोष्ठी ´भोजपुरी-साहित्य आज´ का भी आयोजन किया गया, जिसमें डा. रामदरश मिश्र समेत केदारनाथ सिंह, सांसद रघुनाथ झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र, नसीरपुर के विधायक महाबल मिश्र, मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह, संतोष सिन्हा समेत कई भोजपुरी रचनाकार मौजूद थे।

श्री रामदरश मिश्र ने कहा कि कीसी भी बोली को भाषा का दर्जा पाने के लिए उसके साहित्य का समृद्ध होना बहुत जरुरी है। जब तक उस बोली का साहित्य का समृद्ध नहीं होगा तब तक वह भाषा नहीं बन सकती। भोजपुरी का साहित्य बहुत समृद्ध है, पर यह दुर्भाग्य की बात है कि इसे भाषा का दर्जा दिलाने के लिए इसके रचनाकारों ने कभी कोशिश नहीं की। भारतेन्दु के साहित्य में भोजपुरी परिलक्षित हुआ है, पर वे खड़ी बोली को समृद्ध करने में लगे रहे। वे कभी भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के चक्कर में नहीं पड़े, पर अब इस ओर पहल हो रही है, तो देर-सबेर इसे शामिल कर ही लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस समय भोजपुरी साहित्य में जो रचना कर्म हो रहा है उससे भोजपुरी साहित्य बहुआयामी रुप में समृद्ध होगा। भोजपुरी का लोक साहित्य भी अन्य भाषाओं के मुकाले काफी समृद्ध है और इसे इसका फयदा देर सबेर जरूर मिलेगा।

व्रिष्ठ साहित्यकार डा. केदार नाथ सिंह ने कहा कि आज भोजपुरी में इतना कुछ लिखा जा रहा है कि इसे साहित्य का दर्जा देने में किसी को कोई आपति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात की जरूरत बतायी कि भोजपुरी में जो कुछ भी लिखा जा रहा है उसका अनुवाद भी होना चाहिए और भोजपुरी साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए। सांसद रघुनाथ झा ने कहा कि पूर्वांचलवासियों में शक्ति तो है, पर एकजुटता की कमी है।

उन्होंने कहा कि तमाम छोटे-छोटे संगठनों को आपस में मिलाकर एक महासंघ बनाने की जरूरत है, तभी वह अपनी बात प्रभावी ढंग से सरकार के सामने रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि मै अपने स्तर पर भोजपुरी को आठवी अनुसूची में शामिल करवाने का प्रयास कर रहा हूं। मै संसद में भी इस बाव को उठा चुका हूं।


इस अवसर पर मंच की स्मारिका ´पूर्वांकुर´ का विमोचन भी किया गया समारोह का समापन भोजपुरी के जाने माने गायकों भरत शर्मा व्यास, तरूण तूफानी, संगीता यादव, विजया भारती, भानु यादव आदि के कार्यक्रमों से हुआ।



श्री कृष्ण जन्माष्टमी

महान कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। ´पूर्वांचल एकता मंच´ प्रत्येक वर्ष इस दिन को ´श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह´ का आयोजन करता ह। पूर्णतया भक्तिमय परिवेश में हजारो की संख्या में पूर्वांचलवासी इस समारोह में भाग लेते है। पूरे दिन एवं मध्य रात्रि तक गीत - संगीतमय भजन व पूजन का कार्यक्रम चलता रहता है। इस अवसर पर देश के अनेक सुप्रसिद्ध भोजपुरी लोकगायकों - गायिकाओं द्वारा भक्तिगीतों की आकर्षक प्रस्तुति की जाती है। भगवान श्री कृष्ण के छठियार के दिन संस्था की ओर से एक विशाल भण्डारे का आयोजन भी किया जाता है जिसमें हजारों लोग भोजन रूपी भगवान का प्रसाद पाकर स्वयं को धन्य अनुभव करते है।

अष्टयाम्

पूर्वाचल एकता मंच प्रति वर्ष अष्टयाम का आयोजन करता है।

हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।

इस महामंत्र का गायन 24 घंटे तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा पूरी लय और ताल के साथ मधुर स्वर में किया जाता है।इस महायज्ञ में हजारों लोग भाग लेते हैं। यज्ञ के पश्चात् भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस समारोह में सर्वश्रेष्ठ कीर्तन मंडली को पुरस्कृत भी किया जाता है।

छठ पर्व

समस्त पूर्वांचल क्षेत्र में सूर्य देवता की आराधना छठ पूजा के रुप में की जाती है। यह त्योहार पूर्वांचल की संस्कृति की पहचान है। इस पर्व में भगवान भास्कर की उपासना संध्या और प्रात: दोनो समय अध्र्य देकर की जाती है। ´पूर्वांचल एकता मंच की सभी शाखाएं प्रत्येक वर्ष अपने-अपने क्षेत्र में छठ पर्व समारोह का आयोजन करती हैं। इस पूजन समारोह में लाखों स्त्री-पुरुष श्रद्धा व उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए अपने आराध्य सूर्य देवता को फल, फूल, मिष्ठान, ठेकुआ, पकवान आदि अर्पित करते हुए उपासना करते है।

स्वास्थ्य शिविर

14 नवंबर 2001 को पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान में एक स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. बी.के. सिंह एवं अन्य चिकित्सकों के द्वारा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के स्वास्थ की जॉच की गई। संस्था की ओर से दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया गया।

होली मिलन समारोह

´पूर्वांचल एकता मंच´ हर साल अत्यंत धूमधाम के साथ होली मिलन समारोह का आयोजन करता है। पूर्वांचल के हजारों लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर परस्पर गले मिलते है और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम व सद्भाव को प्रकट करते है। इस समारोह में पूर्वांचल के सुप्रतिष्ठत राजनेता साहित्यकार, लाककलाकार, समाजसेवी आदि सम्मिलित होते है और उनस्थि जनसमूह को संबोधित करते है। इस अवसर पर देश के जाने-माने भोजपुरी व मैथिली गायक-गायिका अपने सुमधुर स्वर में फगुआ, चैती, होरी आदि लोकगीत गाकर लोगों को रसविभोर कर देते है।

 



 

 

 
     
 
 
   
   
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शिवजी सिंह
अध्यक्ष
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