भोजपुरी
भाषा के लिए प्रदर्शन - 2004

भोजपुरी भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल
करने की मॉग को लेकर पूर्वांचल एकता मंच के हजारों सदस्यों ने 30 जनवरी
2004 को जंतर-मंतर पर विशाल प्रदशZन किया। प्रदशZन का नेतृत्व पूर्वांचल
एकता मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह ने किया। भारी भीड़ को संबोधित
करते हुए श्री सिंह ने कहा कि करोड़ों लोगों द्वारा बोली जाने वाली
भोजपुरी भाषा को उपेक्षित करना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने मॉग की
कि भोजपुरी को शीघ्र ही संविधान की अष्टम अनुसूची में सम्मिलित किया
जाए। बाद में इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी ज्ञापन दिया गया। इस
प्रदशZन में पूर्व मंत्री डॉ. प्रभुनाथ सिंह, भोजपुरी समाज, वीर कुंवर
सिंह क्लब, विश्व भोजपुरी सम्मेलन, भोजपुरी-अवधी समाज सदस्यों ने भी
हिस्सा लिया।

सरकार भोजपुरी की उपेक्षा
कर रही : जनेश्वर

पूर्व केंद्रीय मंत्री जनेश्वर मिश्र ने कहा कि भोजपुरी
दुनिया की सबसे प्रभावशाली और रसिक भाषा है। लेकिन केंद्र सरकार की
उपेक्षा के कारण भोजपुरी को बोली से अधिक भाषा के स्तर पर नहीं बढने
दिया जा रहा है। वह रविवार को द्वारका में पूर्वांचल एकता मंच की ओर
से आयोजित भोजपुरी स्वाभिमान समारोह को संबोधित कर रहे थे। श्री मिश्र
ने कहा कि स्वाधीनता संग्राम में भोजपुरी इलाके का योगदान अहम रहा।
वर्ष 1942 के भारत छोडो़ आंदोलन के समय समूचा भोजपुरी क्षेत्र रणभूमि
में तब्दील हो गया था अैार अंग्रजों से लोहा लिया था। लेकिन इस भाषा
को आज तक वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसका वह हकदार है। श्री मिश्र ने
केंद्र सरकार से भोजपुरी को संविधान के अष्टम सूची में शामिल करने
की मांग की। उन्होंने कहा कि भोजपुरी केवल जीभ की बोली ही नहीं, बल्कि
शरीर के भंगिमा की भाषा भी है।

समारोह में बिहार सरकार के पूर्व वित्त मंत्री व
भोजपुरी आंदोलन से जुड़े डा. प्रभुनाथ सिंह ने कहा कि सरकार को चाहिए
कि वह संविधान के अष्टम सूची को ही समाप्त कर दे या फिर सभी भाषाओं
को अष्टम सूची में शामिल करे। उन्होंने कहा कि इससे भाषा के नाम पर
विवाद समाप्त हो जाएगा। डा. सिंह ने कहा कि हिंदी भाषा बोलने वाले
80 प्रतिशत लोग भोजपुरी भाषा-भाषी है। विश्वभर में करीब 20 करोड़ लोग
भोजपुरी बोलते है। लेकिन भारत सरकार इस भाषा को मान्यता देने के लिए
तैयारी नहीं है। समारोह के विशिष्ट अतिथि भोजपुरी समाज के अध्यक्ष
अजीत दूबे ने कहा कि दुनिया साक्षी है कि वही समाज जिंदा रहता है जो
अपनी भाषा को सम्मान देता है। उन्होंने लोगों से भोजपुरी भाषा को आगे
बढाने का आह्मन किया। उन्होंने कहा कि दुनियां के कई देशों में भोजपुरी
भाषा-भाषी लोग शासन चला रहे है।

समारोह के दूसरे सत्र में ´भोजपुरी के उपेक्षा काहे´
विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार
डा. रामदरश मिश्र ने कहा कि भोजपुरी के लोकगीत उसकी निधि और धरोहर
हैं। लोकगीतों में इतनी विविधता कहीं और नहीं मिलती है। उन्होंने कहा
कि लोकगीतों के आइने में ही हम भाजपुरी समाज को देख सकते हैं। भोजपुरी
में मानक साहित्य लिखा जा रहो है, जिसमें आधुनिक विडंबना और विसंगतियों
को भी दशाZया जा रहा है
उन्होंने कहा कि भारतेंदु लेकर प्रेमचंद, आचार्य
रामचंद्र शुक्ल, डा. हजारी प्रसाद द्विवेदी जैसे विद्वान भोजपुरी की
मिट्टी के ही देन हैं। इस अवसर पर मारीशस के उच्चायुंक्त दानीलाल शिबू
को भिखारी ठाकुर शिखर सम्मान देने की घोषणा की गई। जबकि बिहार सरकार
के पूर्व वित्त मंत्री और भोजपुरी आंदोलन से जुुड़े डा. प्रभुनाथ सिंह
को भोजपुरी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इस मौके से वरिष्ठ साहित्यकार
डा. रामा शंकर श्रीवास्तव, पूर्वांचल एकता मंच के संरक्षक हरेंद्र
प्रताप सिंह, भोजपुरी समाज के उपाध्यक्ष पी. एन. पांडेय, सचिव वीरेश
प्रताप सिंह, वीर कुंअर सिंह क्लब के अध्यक्ष निर्मल सिंह, आईएएस राम
उपदेश सिंह, पूर्वांचल एकता मंच के संरक्षक विजय नारायण चौधरी, डा.
रसिक बिहार ओझा, डा. जयकांत सिंह जय, प्रो. राजगृही सिंह, अविनाश नागदंश,
युवक कांग्रस के प्रदेश महासचिव सुमेश शौकीन, प्रहलाद सिंह, संतोष
सिंहा, गौरी शंकर सिंह, अनिल कुमार सिंह समेत काफी संख्या में गणमान्य
लोग उपस्थित थे।
इस अवसर पर मंच की स्मारिका ´पूर्वांकुर´ का विमोचन भी किया गया समारोह
का समापन भोजपुरी के जाने माने गायकों भरत शर्मा व्यास, तरूण तूफानी,
संगीता यादव, विजया भारती, भानु यादव आदि के कार्यक्रमों से हुआ।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी
महान कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष
की अष्टमी तिथि को हुआ था। ´पूर्वांचल एकता मंच´ प्रत्येक वर्ष इस
दिन को ´श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह´ का आयोजन करता ह। पूर्णतया
भक्तिमय परिवेश में हजारो की संख्या में पूर्वांचलवासी इस समारोह में
भाग लेते है। पूरे दिन एवं मध्य रात्रि तक गीत - संगीतमय भजन व पूजन
का कार्यक्रम चलता रहता है। इस अवसर पर देश के अनेक सुप्रसिद्ध भोजपुरी
लोकगायकों - गायिकाओं द्वारा भक्तिगीतों की आकर्षक प्रस्तुति की जाती
है। भगवान श्री कृष्ण के छठियार के दिन संस्था की ओर से एक विशाल भण्डारे
का आयोजन भी किया जाता है जिसमें हजारों लोग भोजन रूपी भगवान का प्रसाद
पाकर स्वयं को धन्य अनुभव करते है।

अष्टयाम्
पूर्वाचल एकता मंच प्रति वर्ष अष्टयाम का आयोजन करता है।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
इस महामंत्र का गायन 24 घंटे तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा पूरी
लय और ताल के साथ मधुर स्वर में किया जाता है।इस महायज्ञ में हजारों
लोग भाग लेते हैं। यज्ञ के पश्चात् भंडारे का आयोजन किया जाता है।
इस समारोह में सर्वश्रेष्ठ कीर्तन मंडली को पुरस्कृत भी किया जाता
है।


छठ पर्व
समस्त पूर्वांचल क्षेत्र में सूर्य देवता की आराधना छठ पूजा के रुप
में की जाती है। यह त्योहार पूर्वांचल की संस्कृति की पहचान है। इस
पर्व में भगवान भास्कर की उपासना संध्या और प्रात: दोनो समय अध्र्य
देकर की जाती है। ´पूर्वांचल एकता मंच की सभी शाखाएं प्रत्येक वर्ष
अपने-अपने क्षेत्र में छठ पर्व समारोह का आयोजन करती हैं। इस पूजन
समारोह में लाखों स्त्री-पुरुष श्रद्धा व उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए
अपने आराध्य सूर्य देवता को फल, फूल, मिष्ठान, ठेकुआ, पकवान आदि अर्पित
करते हुए उपासना करते है।


स्वास्थ्य शिविर
14 नवंबर 2001 को पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान
में एक स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. बी.के. सिंह एवं
अन्य चिकित्सकों के द्वारा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के स्वास्थ की
जॉच की गई। संस्था की ओर से दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया गया।
होली मिलन समारोह
´पूर्वांचल एकता मंच´ हर साल अत्यंत धूमधाम के साथ होली मिलन समारोह
का आयोजन करता है। पूर्वांचल के हजारों लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर
परस्पर गले मिलते है और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम व सद्भाव
को प्रकट करते है। इस समारोह में पूर्वांचल के सुप्रतिष्ठत राजनेता
साहित्यकार, लाककलाकार, समाजसेवी आदि सम्मिलित होते है और उनस्थि जनसमूह
को संबोधित करते है। इस अवसर पर देश के जाने-माने भोजपुरी व मैथिली
गायक-गायिका अपने सुमधुर स्वर में फगुआ, चैती, होरी आदि लोकगीत गाकर
लोगों को रसविभोर कर देते है।

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