पूर्वांचल
स्वाभिमान समारोह - 2003

पुर्वांचल एकता मंच द्वारा 12 अक्टूबर 2003 को नई
दिल्ली में ´पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह´ का आयोजन किया गया। इस अवसर
पर मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती
शीला दीक्षित ने कहा कि प्रतिवर्ष पूर्वांचल की भाषा व संस्कृति को
बढावा देने वाले कार्यक्रमों का आयोजन कर पूर्वांचल एकता मंच एक सराहनीय
कार्य कर रहा है। इसके लिए उन्होंने मंच के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह
को हादिZक बधाई दी। श्री शिवजी सिंह ने मुख्यमंत्री से मॉग की कि दिल्ली
में ´मैथिली-भोजपुरी अकादमी´ का गठन किया जाए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन
दिया कि वे इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगी।

इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री डॉ. साहिब सिंह वर्मा ने पूर्वांचल के
लोगों की कर्मष्ता व एकजुटता की भूरि-भूरि प्रशांसा की। डॉ. वर्मा
ने कहा कि भोजपुरी भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में सम्मिलित
कराने का वे भरपूर प्रयास करेंगे।
इस समारोह में ´भोजपुरी साहित्य में युग चेतना´ विषय पर एक विचार
संगोश्ठी का भी आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामदरश
मिश्र, डॉ. आशा रानी लाल आदि अनेक साहित्यकारों ने भाग लिया। संगोष्ठी
का संचालन ´पूर्वांकुर´ पत्रिका के सम्पादक संतोष सिन्हा ने किया।
समारोह के संास्कृतिक सत्र में सुप्रसिद्ध भोजपुरी गायक भरत शर्मा
व्यास, तरुण तूफानी, संगीता यादव, प्रेम सागर आदि अनेक कलाकारों ने
अपने मधुर गीतों के द्वारा हजारों श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

भोजपुरी कवि सम्मेलन
15 अगस्त 2003 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भोजपुरी
कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ संतोष सिन्हा
की कविता से हुआ।
जेकर चरन पखारे सागर अउर सरताज हिमालय ह ।
ऋषि-मुनियन के जन्मभूमि भारत पवन देवालय ह ।।
नगेन्द्र सिंह ´व्यास´ के देश भक्ति गीत ने श्रोताओं में जोश भर दिया
हंसि-हंसि लिखे हिन्दुस्तानी नारी पाती,
सीमवा पर अइब दुश्मन तूरि देबि छाती,।
विजय कुमार सिंह की कविता - ´´हमार देश हमरा हिया में बसेला´´ ने
पूरे माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया
संतोष पटेल ने अपने गीत - ´´देशप्रेम अपनाई´´ से श्रोताओ का मन मोह
लिया। कवि राजनंदन ने अपनी भोजपुरी कविता सुनाई। देशभक्ति गीतों से
सराबोर इस कवि सम्मेलन में रमेश कुमार सिंह, सुशील कुसुमाकर, राजेश
कुमार लाल दास, गुरुविन्दर सिंह ´गुरु´ आदि अनेक कवियों ने भाग लिया।
मंच संचालन संतोष सिन्हा ने किया।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी
महान कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष
की अष्टमी तिथि को हुआ था। ´पूर्वांचल एकता मंच´ प्रत्येक वर्ष इस
दिन को ´श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह´ का आयोजन करता ह। पूर्णतया
भक्तिमय परिवेश में हजारो की संख्या में पूर्वांचलवासी इस समारोह में
भाग लेते है। पूरे दिन एवं मध्य रात्रि तक गीत - संगीतमय भजन व पूजन
का कार्यक्रम चलता रहता है। इस अवसर पर देश के अनेक सुप्रसिद्ध भोजपुरी
लोकगायकों - गायिकाओं द्वारा भक्तिगीतों की आकर्षक प्रस्तुति की जाती
है। भगवान श्री कृष्ण के छठियार के दिन संस्था की ओर से एक विशाल भण्डारे
का आयोजन भी किया जाता है जिसमें हजारों लोग भोजन रूपी भगवान का प्रसाद
पाकर स्वयं को धन्य अनुभव करते है।

अष्टयाम्
पूर्वाचल एकता मंच प्रति वर्ष अष्टयाम का आयोजन करता है।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
इस महामंत्र का गायन 24 घंटे तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा पूरी
लय और ताल के साथ मधुर स्वर में किया जाता है।इस महायज्ञ में हजारों
लोग भाग लेते हैं। यज्ञ के पश्चात् भंडारे का आयोजन किया जाता है।
इस समारोह में सर्वश्रेष्ठ कीर्तन मंडली को पुरस्कृत भी किया जाता
है।


छठ पर्व
समस्त पूर्वांचल क्षेत्र में सूर्य देवता की आराधना छठ पूजा के रुप
में की जाती है। यह त्योहार पूर्वांचल की संस्कृति की पहचान है। इस
पर्व में भगवान भास्कर की उपासना संध्या और प्रात: दोनो समय अध्र्य
देकर की जाती है। ´पूर्वांचल एकता मंच की सभी शाखाएं प्रत्येक वर्ष
अपने-अपने क्षेत्र में छठ पर्व समारोह का आयोजन करती हैं। इस पूजन
समारोह में लाखों स्त्री-पुरुष श्रद्धा व उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए
अपने आराध्य सूर्य देवता को फल, फूल, मिष्ठान, ठेकुआ, पकवान आदि अर्पित
करते हुए उपासना करते है।


स्वास्थ्य शिविर
14 नवंबर 2001 को पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान
में एक स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. बी.के. सिंह एवं
अन्य चिकित्सकों के द्वारा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के स्वास्थ की
जॉच की गई। संस्था की ओर से दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया गया।

होली मिलन समारोह
´पूर्वांचल एकता मंच´ हर साल अत्यंत धूमधाम के साथ होली मिलन समारोह
का आयोजन करता है। पूर्वांचल के हजारों लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर
परस्पर गले मिलते है और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम व सद्भाव
को प्रकट करते है। इस समारोह में पूर्वांचल के सुप्रतिष्ठत राजनेता
साहित्यकार, लाककलाकार, समाजसेवी आदि सम्मिलित होते है और उनस्थि जनसमूह
को संबोधित करते है। इस अवसर पर देश के जाने-माने भोजपुरी व मैथिली
गायक-गायिका अपने सुमधुर स्वर में फगुआ, चैती, होरी आदि लोकगीत गाकर
लोगों को रसविभोर कर देते है।

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