पूर्वांचल
स्वाभिमान समारोह - 2001
8 अप्रैल 2001 को दादा दे मेला ग्रउंड, द्वारका सेक्टर-8, पालम नई
दिल्ली में पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह का आयोजन किया गाया। समारोह
के मुख्य अतिथी केन्द्रीय श्रम मंत्री श्री साहिब सिंह वर्मा ने कहा
कि दिल्ली महानगर में पूर्वांचल के लोगों की अपनी एक अलग पहचान है।
अब पूर्वांचल की जीवन-शैली, भाषा और पर्व-त्यौहार से दिल्ली भी गूंजने
लगी है। पूर्वांचल के लोगों ने अपनी कर्मष्ता और समर्पित भावना के
साथ दिल्ली के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया है। पूर्वांचल की प्रतिनिधि
संस्था पूर्वांचल एकता मंच अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण व उत्थान
के लिए जो प्रयास कर रही है वह सराहनीय है। इस अवसर पर विधायक श्री
महाबल मिश्रा ने पूर्वांचलवासियों से एकजुटता का आह्वान किया।
´पूर्वांचल एकता मंच´ के अध्यक्ष श्री शिवजी सिंह
ने केन्द्रीय मंत्री श्री साहिब सिंह वर्मा व अन्य राजनेताओं से मॉग
की कि भोजपुरी भाषा को संविधान की अश्टम अनुसूची में षामिल किया जाए।
श्री सिंह ने पूर्वांचल के लोगों की एकजुटता पर बल देते हुए कहा कि
हम संगठित रहकर ही अपने स्वाभिमान अपनी संस्कृति व भाषा के लिए संघर्ष
कर सकते है। उन्होंने कहा कि यदि भोजपुरी को शीघ्र ही संविधान की अष्टम
सूची में सम्मिलित नहीं किया गया तो पूर्वांचल एकता मंच धरना व प्रदशZन
आदि से भी पीछे नहीं हटेगा।
इस अवसर पर पूर्व सांसद श्री सज्जन कुमार ने पूर्वांचल
एकता मंच के संघर्ष के साथ अपनी एकजुटता का आश्वासन दिया। समाजसेवी
श्रीमती शर्मिला पाण्डेय ने समारोह के आयोजन के लिए श्री शिवजी सिंह
को बधाई दी।
समारोह के संास्कृतिक सज में रंगारंग संास्कृतिक
कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सुप्रसिद्ध लोकगायिका विजया भारती, गायक
भारत शर्मा, तरुण तूफानी, प्रेम सागर, गजाधर ठाकुर आदि कलाकारों ने
भोजपुरी लोकगीतों के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में विधायक श्री महेन्द्र यादव, पूर्व
विधायक श्री धर्मदेव सोलंकी, युवा कांग्रेस के महासचिव श्री सुमेश
शौकीन, पुर्वांचल एकता मंच के संरक्षक श्री हरेन्द्र प्रताप सिंह,
श्री भगवान सिंह श्री बी. एन. चौधरी, श्री विनोद तिवारी, श्री सुरेन्द्र
सिंह, श्री पी. एन. यादव, श्री अनिल सिंह आदि अनेक गणमान्य व्यक्ति
उपस्थित थे। पूर्वांचल एकता मंच के मीडिया प्रभारी श्री संतोष सिन्हा
ने मंच का संचालन किया।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी
महान कर्मयोगी भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष
की अष्टमी तिथि को हुआ था। ´पूर्वांचल एकता मंच´ प्रत्येक वर्ष इस
दिन को ´श्री कृष्ण जन्माष्टमी समारोह´ का आयोजन करता ह। पूर्णतया
भक्तिमय परिवेश में हजारो की संख्या में पूर्वांचलवासी इस समारोह में
भाग लेते है। पूरे दिन एवं मध्य रात्रि तक गीत - संगीतमय भजन व पूजन
का कार्यक्रम चलता रहता है। इस अवसर पर देश के अनेक सुप्रसिद्ध भोजपुरी
लोकगायकों - गायिकाओं द्वारा भक्तिगीतों की आकर्षक प्रस्तुति की जाती
है। भगवान श्री कृष्ण के छठियार के दिन संस्था की ओर से एक विशाल भण्डारे
का आयोजन भी किया जाता है जिसमें हजारों लोग भोजन रूपी भगवान का प्रसाद
पाकर स्वयं को धन्य अनुभव करते है।

अष्टयाम्
पूर्वाचल एकता मंच प्रति वर्ष अष्टयाम का आयोजन करता है।
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ।।
इस महामंत्र का गायन 24 घंटे तक विभिन्न कीर्तन मंडलियों द्वारा पूरी
लय और ताल के साथ मधुर स्वर में किया जाता है।इस महायज्ञ में हजारों
लोग भाग लेते हैं। यज्ञ के पश्चात् भंडारे का आयोजन किया जाता है।
इस समारोह में सर्वश्रेष्ठ कीर्तन मंडली को पुरस्कृत भी किया जाता
है।


छठ पर्व
समस्त पूर्वांचल क्षेत्र में सूर्य देवता की आराधना छठ पूजा के रुप
में की जाती है। यह त्योहार पूर्वांचल की संस्कृति की पहचान है। इस
पर्व में भगवान भास्कर की उपासना संध्या और प्रात: दोनो समय अध्र्य
देकर की जाती है। ´पूर्वांचल एकता मंच की सभी शाखाएं प्रत्येक वर्ष
अपने-अपने क्षेत्र में छठ पर्व समारोह का आयोजन करती हैं। इस पूजन
समारोह में लाखों स्त्री-पुरुष श्रद्धा व उत्साह पूर्वक भाग लेते हुए
अपने आराध्य सूर्य देवता को फल, फूल, मिष्ठान, ठेकुआ, पकवान आदि अर्पित
करते हुए उपासना करते है।


स्वास्थ्य शिविर
14 नवंबर 2001 को पूर्वांचल एकता मंच के तत्वावधान
में एक स्वास्थ शिविर का आयोजन किया गया। इसमें डॉ. बी.के. सिंह एवं
अन्य चिकित्सकों के द्वारा क्षेत्र के सैकड़ों लोगों के स्वास्थ की
जॉच की गई। संस्था की ओर से दवाइयों का मुफ्त वितरण भी किया गया।
होली मिलन समारोह
´पूर्वांचल एकता मंच´ हर साल अत्यंत धूमधाम के साथ होली मिलन समारोह
का आयोजन करता है। पूर्वांचल के हजारों लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर
परस्पर गले मिलते है और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर आपसी प्रेम व सद्भाव
को प्रकट करते है। इस समारोह में पूर्वांचल के सुप्रतिष्ठत राजनेता
साहित्यकार, लाककलाकार, समाजसेवी आदि सम्मिलित होते है और उनस्थि जनसमूह
को संबोधित करते है। इस अवसर पर देश के जाने-माने भोजपुरी व मैथिली
गायक-गायिका अपने सुमधुर स्वर में फगुआ, चैती, होरी आदि लोकगीत गाकर
लोगों को रसविभोर कर देते है।


|