विश्व भोजपुरी सम्मेलन में भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मॉग - 2008
 
  भागवत कथा का आयोजन - 2007  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2006  
  द्वारका में पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह आयोजित - 2005  
  भोजपुरी भाषा के लिए प्रदर्शन - 2004  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2003  
  विश्व भोजपुरी सम्मेलन में- 2002  
  पूर्वांचल स्वाभिमान समारोह - 2001  
   

 

किसी भी संस्था की ताकत उसकी समिति के बुलद इरादे वाले सदस्य होते हैं। पूर्वांचल एकता मंच (रजि.) की कोर टीम में ऐसे सदस्यों की कमी नहीं है जो अपने रोमर्रा की जिनदगी से दो हाथ करते हुए भी अपने समाज अपने क्षेत्र और अपने मातृभासा के बारे में न सिर्फ बौद्विक स्तर पर सोचते है बल्कि जरूरत पडने पर धरना प्रर्दशन और आंदोलन के लिए तैयार भी रहते है।
 
   


 

 

 
   
 
८ वी अनुसूची में भोजपुरी भाषा को शामिल करने के लिए जंतर- मंतर पर धरना
 

पूर्वांचल एकता मंच के नेतृत्व में जंतर मंतर पर देश भर के 100 से अधिक भोजपुरी संगठनों/संस्थाओं ने भोजपुरी को संविधान के अष्टम अनुसूची में शामिल कराने हेतु सरकार से मानसून के इसी सत्र में मांग की। पूर्वांचल एकता मंच के बैनर तले देश भर से जुटे हजारों भोजपुरी भाषा-भाषियों ने जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह ने सरकार से मांग की कि ‘भोजपुरी को अष्टम अनुसूची में सरकार अगर इसी सत्र में नहीं लाती है तो हम सड़क पर आने के लिए मजबूर होगे और देशव्यापी आंदोलन करेगे’।

इस धरना में बी.आर.ए., बिहार विश्वविद्यालय में लंगट सिंह कॉलेज, मुज़फ्फरपुर, बिहार में भोजपुरी भाषा केन्द्र अध्यक्ष डॉ. जयकांत सिंह जय ने कहा कि सरकार भोजपुरी के साथ अनावश्यक रूप से भेदभाव कर रही है। भोजपुरी भाषा में लोक साहित्य, शिष्ट साहित्य, लिपि, व्याकरण, इतिहास एवं पठन-पाठन संबंधी अन्य भाषाओं के समान प्रत्येक वह चीज उपलब्ध है जो भारत के संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य भाषाओं में हैं। भोजपुरी राष्ट्रीय ही नहीं अपितु अन्तर्राष्ट्रीय पहचान रखती है अतः सरकार को ढुलमुल नीति छोड़कर इसे अष्टम अनुसूची में शामिल करने के लिए गम्भीर प्रयास करने चाहिए।

पूर्वांचल एकता मंच के संयोजक चंद्रशेखर राय ने कहा ‘‘भोजपुरी हमारी मातृ भाषा है और जिस तरह हम अपनी मां का सम्मान करते है उसी प्रकार सरकार को भोजपुरी का सम्मान करते हुए इसको तत्काल अष्टम अनुसूची में शामिल करना चाहिए’’। इस भाषा में न केवल हमारा वर्तमान बल्कि भावी पीढ़ी इसे पढ़ कर हमारी पुरानी संस्कृति को समझ पायेगी। पूर्वांचल एकता मंच के संरक्षक श्री संजय सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा आज हम एक दिन के धरना प्रदर्शन से अपनी मांग सरकार के सामने रख रहे है, अगर सरकार इसे पूरी करने में असफल होती है तो हम देश व्यापी आंदोलन छेड़ेगे और चक्का जाम करेगे।

इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए संतोष पटेल ने कहा की भोजपुरी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं के अनुरूप समस्त मापदण्डों को पूरा करती है अतः इसे यथाश्रीघ अष्टम अनुसूची में स्थान दिया जाय। धरना में शामिल होने वालों में मंच के संरक्षक सतेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि हम ‘विश्व भोजपुरी सम्मेलन’ के माध्यम से नेताओं को सम्मान इसलिए देते हैं कि वे हमारी बात को अर्थात् भोजपुरी माई को उचित सम्मान दिलाने के लिए संसद में अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे। अगर वे ऐसा करने में असफल होते हैं तो हम देशव्यापी आन्दोलन हेतु मजबूर हो जाएंगे।

सभा को सम्बोधित करते हुए श्री मुकेश कुमार सिंह, प्रवक्ता पूर्वांचल एकता मंच ने कहा कि भोजपुरी हिन्दुस्तान की सबसे मधुर भाषा है। यह भाषा हिन्दुस्तान के अतिरिक्त अन्य कई देशों में बोली जाती है। लगभग 25 करोड़ की आबादी भोजपुरी भाषी है इसके बावजूद सरकार इस भाषा को अभी तक अष्टम अनुसूची में सम्मिलित नहीं कर पाई है, यह अत्यन्त दुःख के बात है। धरना प्रदर्शन में नेपाल से पधारे श्री राजेन्द्र प्रसाद गुप्ता, चेयरमैन पशुपति ट्राँसपोर्ट (वीरगंज) ने बताया कि नेपाल में संविधान का निर्माण हो रहा है और नेपाल सरकार भोजपुरी भाषा भाषियों को सम्मान देते हुए वहाँ के संविधान में भोजपुरी को राष्ट्रभाषा के रूप में सम्मिलित कर रही है। उन्होंने पूर्वांचल एकता मंच के इस प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। युवा नेता श्री संतोष ओझा, ने भी सभा को संबोधित किया। साथ ही हमार टी.वी. के क्रियेटिव हेड श्री मनोज भावुक, पूर्वांचल एक्सप्रेस के श्री कुलदीप श्रीवास्तव, महिपालपुर से श्री संतोष भट्ट, नारायणा से श्री बजरंगी प्रसाद, बिहारी खबर के श्री मुन्ना पाठक ने भी सभा को सम्बोधित किया।

धरना में शामिल होने वालों में भोजपुरिया अमन के संपादक डाॅ. जनार्दन सिंह, अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के विश्वनाथ शर्मा, पूरवैया (रजि.) के श्री अनिवाश पाण्डे एवं धु्रव प्रसाद, पूर्वांचल एकता मंच के श्री नागेन्द्र सिंह, मन्नू सिंह, श्री सुरेन्दर सिंह, रामप्रीत यादव, संतोष सिंह, रविन्द्र दुबे, एस. के. पाण्डेय, श्रीकांत विद्यार्थी, श्री कारत यादव आदि प्रमुख थे। वाइटर क्लब, वीर कुँवर सिंह फाउण्डेशन आदि के सदस्यों ने अपना समर्थन प्रदान किया।

अन्त में धरना स्थल से धारा 144 का उल्लंघन करते हुए हजारों कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग के लिए कूच किया किन्तु बीच रास्ते में संसद मार्ग पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया और मुख्य पदाधिकारियों को गिरफ्तारी देनी पड़ी। पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, मानव संसाधन विकास मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री, खेल एवं कला मंत्री को भोजपुरी भाषा को अष्टम अनुसूची में शामिल कराने हेतु एक ज्ञापन सौंपा।

सभा के समाप्ति पूर्वांचल एकता मंच के कोषाध्यक्ष अमरेन्दर सिंह एवं कानूनी सलाहकार, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विशाल सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।

 

 
 

 
 
   
   
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शिवजी सिंह
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